भारत(हरियाणा) में भूमि लेन–देन और भूमि प्रशासन से जुड़े कानून
- Team PropertyX

- Dec 20, 2025
- 3 min read
हरियाणा में भूमि खरीदना या बेचना एक कानूनी प्रक्रिया है, जिसके लिए संबंधित कानूनों की जानकारी होना बहुत आवश्यक है। भारत में भूमि और संपत्ति से जुड़े मामले केंद्रीय कानूनों, राज्य कानूनों और स्थानीय नियमों द्वारा नियंत्रित होते हैं।
यह लेख हरियाणा में भूमि लेन–देन और भूमि प्रशासन को नियंत्रित करने वाले प्रमुख कानूनों का सरल परिचय देता है।
1. संपत्ति अंतरण अधिनियम, 1882
यह अधिनियम जीवित व्यक्तियों के बीच संपत्ति के हस्तांतरण को नियंत्रित करता है। इसके अंतर्गत बिक्री, उपहार, पट्टा (लीज), बंधक और विनिमय जैसे लेन–देन आते हैं। यह खरीदार और विक्रेता के अधिकार व दायित्व तय करता है।
लागू होता है: बिक्री विलेख, लीज, गिफ्ट डीड, मॉर्गेज
2. पंजीकरण अधिनियम, 1908
इस कानून के तहत कुछ संपत्ति दस्तावेजों का सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में पंजीकरण अनिवार्य है। पंजीकरण से दस्तावेज को कानूनी वैधता मिलती है और भविष्य के विवादों से सुरक्षा मिलती है।
महत्वपूर्ण: बिना पंजीकरण के बिक्री विलेख कानूनी रूप से मान्य नहीं होता।
3. भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 (हरियाणा स्टाम्प नियम)
संपत्ति लेन–देन पर स्टाम्प ड्यूटी देना आवश्यक होता है। हरियाणा में स्टाम्प ड्यूटी की दर स्थान, संपत्ति के प्रकार और खरीदार की श्रेणी के अनुसार अलग-अलग होती है।
क्यों जरूरी: कम स्टाम्प ड्यूटी वाला दस्तावेज अमान्य हो सकता है।
4. हरियाणा भूमि राजस्व अधिनियम, 1887
यह राज्य कानून भूमि रिकॉर्ड, स्वामित्व प्रविष्टि, म्यूटेशन, भूमि की श्रेणी (कृषि, आवासीय, व्यावसायिक) और राजस्व प्रशासन को नियंत्रित करता है।
इसके अंतर्गत आते हैं:
जमाबंदी
म्यूटेशन
गिरदावरी
भूमि स्वामित्व रिकॉर्ड
5. पंजाब अनुसूचित सड़कें एवं नियंत्रित क्षेत्र अधिनियम, 1963
यह कानून हरियाणा में भी लागू है और राजमार्गों तथा शहरी क्षेत्रों के आसपास भूमि उपयोग को नियंत्रित करता है। निर्माण या भूमि उपयोग परिवर्तन के लिए अनुमति आवश्यक होती है।
महत्वपूर्ण: हाईवे के पास की भूमि के लिए विशेष नियम लागू होते हैं।
6. भूमि उपयोग परिवर्तन (CLU) नियम – हरियाणा
कृषि भूमि को आवासीय, व्यावसायिक या औद्योगिक उपयोग में बदलने के लिए DTCP हरियाणा से CLU अनुमति लेनी होती है।
बिना CLU: निर्माण अवैध घोषित हो सकता है।
7. हरियाणा शहरी क्षेत्र विकास एवं विनियमन अधिनियम, 1975
यह कानून निजी बिल्डरों और कॉलोनाइजरों को नियंत्रित करता है और योजनाबद्ध विकास सुनिश्चित करता है।
खरीदारों के लिए लाभ: अवैध कॉलोनियों से सुरक्षा।
8. रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 – हरियाणा RERA
RERA खरीदारों के हितों की रक्षा करता है और रियल एस्टेट में पारदर्शिता लाता है। बिल्डरों और एजेंटों के लिए परियोजना पंजीकरण अनिवार्य है।
लागू होता है: नई आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाओं पर।
9. भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवजा अधिनियम, 2013
यह कानून सरकार द्वारा भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है और भूमि मालिकों को उचित मुआवजा व पुनर्वास सुनिश्चित करता है।
10. बेनामी लेन–देन निषेध अधिनियम, 1988
यह कानून किसी और के नाम पर संपत्ति खरीदने (बेनामी संपत्ति) को प्रतिबंधित करता है। ऐसी संपत्ति जब्त की जा सकती है।
11. जोनिंग और मास्टर प्लान नियम – हरियाणा
हर जिले और शहर का मास्टर प्लान होता है, जो भूमि उपयोग जैसे आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक और कृषि क्षेत्र निर्धारित करता है।
खरीद से पहले जांचें: भूमि उपयोग आपके उद्देश्य से मेल खाता है या नहीं।
12. स्थानीय नगर निगम एवं पंचायत कानून
स्थानीय निकाय निम्नलिखित को नियंत्रित करते हैं:
भवन योजना स्वीकृति
संपत्ति कर
ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट
स्थानीय अनुपालन
इन कानूनों को समझना क्यों जरूरी है
✔ कानूनी विवादों से बचाव
✔ स्वामित्व की वैधता सुनिश्चित
✔ निवेश की सुरक्षा
✔ अवैध निर्माण से बचाव
✔ खरीदारों का विश्वास बढ़ता है
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्र.1: क्या हरियाणा में भूमि खरीद के लिए पंजीकरण अनिवार्य है?
हाँ, पंजीकरण अधिनियम, 1908 के तहत पंजीकरण अनिवार्य है।
प्र.2: क्या कृषि भूमि पर मकान बनाया जा सकता है?
केवल CLU अनुमति लेने के बाद।
प्र.3: क्या RERA प्लॉट पर लागू होता है?
हाँ, यदि परियोजना RERA के दायरे में आती है।
प्र.4: क्या हरियाणा में भूमि रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध हैं?
हाँ, हरियाणा जमाबंदी पोर्टल पर उपलब्ध हैं।
अस्वीकरण (Disclaimer)
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। इसे कानूनी सलाह न माना जाए। भूमि लेन–देन से पहले योग्य वकील या विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।



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